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बुढ़ाना। नगर पंचायत बुढ़ाना के तत्वावधान में आयोजित बुढ़ाना महोत्सव सोमवार को हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। महोत्सव के दौरान वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘राव अमर सिंह त्यागी रईस बुढ़ाना स्मृति गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। समारोह में उपस्थित अतिथियों ने उनकी निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद राणा यशवंत ने कहा कि जब उन्हें राव अमर सिंह त्यागी के जीवन और कार्यों के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिला, तो यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि बुढ़ाना जैसे कस्बे ने उन्नीसवीं शताब्दी में पत्रकारिता के क्षेत्र में एक गौरवशाली इतिहास रचा था। उन्होंने कहा कि जिस दौर में आधुनिक संचार के साधन उपलब्ध नहीं थे, उस समय बुढ़ाना में प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना करना, वर्ष 1876 में ‘सफीरे बुढ़ाना’ जैसे साप्ताहिक समाचार पत्र का नियमित प्रकाशन शुरू करना, पुस्तकों का मुद्रण करना और देश के विभिन्न हिस्सों तक समाचार पहुंचाना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व के नाम पर सम्मान प्राप्त करना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने इस सम्मान के लिए आयोजकों एवं राव अमर सिंह त्यागी रईस बुढ़ाना परिवार का आभार व्यक्त किया।
समारोह में जिला बार संघ मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी, पूर्व सांसद कादिर राणा, वरिष्ठ समाजवादी नेता ईलम सिंह गुर्जर, पूर्व प्रमुख विनोद मलिक, दीपक प्रधान, अथहर हसन, मौलाना शोएब, मौलाना जुल्फिकार सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
जानिए ‘सफीरे बुढ़ाना’ का गौरवशाली इतिहास
- जून 1866 में स्थापित नगर पंचायत बुढ़ाना के प्रथम चेयरमैन बनने का गौरव राव अमर सिंह त्यागी रईस को प्राप्त हुआ था।
- वर्ष 1876 में प्रकाशित ‘सफीरे बुढ़ाना’ उस समय देश के विभिन्न छोटे-बड़े शहरों, कस्बों और नेपाल तक पढ़ा जाता था। समाचार पत्र में विभिन्न क्षेत्रों के लिए संवाददाताओं की नियुक्ति के विज्ञापन भी प्रकाशित किए जाते थे।
- इस साप्ताहिक समाचार पत्र में काबुल तक की खबरें प्रकाशित होती थीं और पाठकों के पत्रों को भी प्रमुखता से स्थान दिया जाता था। उस समय इसकी वार्षिक सदस्यता शुल्क 9 रुपये था।
- 11 अक्टूबर 1876 के अंक में मध्य प्रदेश के मोरटक्का स्थित नर्मदा नदी पर बने रेल पुल पर 5 अक्टूबर 1876 से रेल संचालन शुरू होने की खबर प्रकाशित हुई थी। करीब पांच वर्षों में बने इस पुल के निर्माण पर उस समय लगभग 19 लाख रुपये की लागत आई थी। यह तथ्य दर्शाता है कि ‘सफीरे बुढ़ाना’ राष्ट्रीय महत्व की खबरों का भी विश्वसनीय माध्यम था।
