NEW DGP RAJEEV
लखनऊ। लगभग चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को आखिरकार अपना नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश पुलिस की कमान सौंप दी है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश पुलिस तकनीकी आधुनिकीकरण, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसी नई चुनौतियों का सामना कर रही है।
राजीव कृष्ण की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस नेतृत्व में स्थिरता की वापसी के रूप में भी देखी जा रही है। मई 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल के हटने के बाद प्रदेश में लगातार कार्यवाहक डीजीपी ही जिम्मेदारी संभालते रहे। इस दौरान डी.एस. चौहान, आर.के. विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और स्वयं राजीव कृष्ण कार्यवाहक डीजीपी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
IIT से IPS तक का सफर
20 जून 1969 को जन्मे राजीव कृष्ण की पहचान शुरू से ही एक मेधावी छात्र के रूप में रही है। उन्होंने IIT रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। महज 22 वर्ष की आयु में आईपीएस बनने वाले राजीव कृष्ण अपने बैच के सबसे युवा अधिकारियों में शामिल थे।
फील्ड पुलिसिंग में मजबूत पहचान
अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने फिरोजाबाद, मथुरा, आगरा, लखनऊ, इटावा और गौतमबुद्ध नगर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी सख्त कार्यशैली और ऑपरेशनल नेतृत्व क्षमता ने उन्हें एक प्रभावी पुलिस अधिकारी की पहचान दिलाई।
वर्ष 2004 में आगरा के एसएसपी रहते हुए उन्होंने अपहरण और फिरौती के कई चर्चित मामलों का सफल खुलासा किया। इसी दौरान अपराधियों के खिलाफ उनकी कार्रवाई ने उन्हें एक मजबूत फील्ड अधिकारी के रूप में स्थापित किया।

यूपी ATS के पहले प्रमुख
राजीव कृष्ण का नाम उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की स्थापना से भी जुड़ा है। वर्ष 2008 में जब यूपी ATS का गठन हुआ, तब उन्हें इसका पहला प्रमुख बनाया गया। उन्होंने संगठन की आधारभूत संरचना तैयार करने के साथ-साथ उसकी कार्यप्रणाली को भी विकसित किया। आज यूपी ATS जिस मजबूती के साथ काम कर रही है, उसकी शुरुआती नींव रखने में उनकी अहम भूमिका रही है।
सीमा सुरक्षा से लेकर तकनीकी पुलिसिंग तक
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) में इंस्पेक्टर जनरल (ऑपरेशंस) और जम्मू फ्रंटियर प्रमुख जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इस दौरान उन्होंने सीमाओं पर आधुनिक निगरानी प्रणाली और तकनीक आधारित सुरक्षा उपायों को बढ़ावा दिया।
तकनीक आधारित पुलिसिंग हमेशा से उनकी प्राथमिकता रही है। उन्होंने पुलिस व्यवस्था को डिजिटल बनाने, अपराधियों की डेटा आधारित निगरानी और साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। ‘ऑपरेशन पहचान’ और ‘ई-मालखाना’ जैसी योजनाएं उनकी इसी सोच का परिणाम मानी जाती हैं।
कांस्टेबल भर्ती परीक्षा बनी टर्निंग प्वाइंट
वर्ष 2024 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की जिम्मेदारी राजीव कृष्ण को सौंपी। उनके नेतृत्व में लगभग 48 लाख अभ्यर्थियों वाली देश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
उन्होंने AI आधारित निगरानी, बहुस्तरीय सत्यापन और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। 60 हजार से अधिक कांस्टेबलों की भर्ती बिना किसी बड़े विवाद के पूरी होना उनकी सबसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धियों में गिना जाता है।
तीन साल का लंबा कार्यकाल
राजीव कृष्ण जून 2029 तक सेवा में रहेंगे, जिससे उन्हें लगभग तीन वर्षों का कार्यकाल मिलेगा। यह अवधि उन्हें केवल रोजमर्रा की पुलिसिंग ही नहीं बल्कि दीर्घकालिक सुधार योजनाओं को लागू करने का अवसर भी प्रदान करेगी।
उन्होंने कार्यवाहक डीजीपी रहते हुए साइबर अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन, तकनीक आधारित पुलिसिंग और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया था। अब स्थायी डीजीपी के रूप में इन योजनाओं को व्यापक स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। साइबर अपराधों का बढ़ता दायरा, महिलाओं की सुरक्षा, संगठित अपराध, पुलिस बल का आधुनिकीकरण और नए भर्ती हुए जवानों का प्रभावी प्रबंधन जैसे मुद्दे उनके सामने बड़ी परीक्षा होंगे।
हालांकि आतंकवाद-रोधी अभियानों, फील्ड पुलिसिंग, प्रशासनिक प्रबंधन और तकनीकी नवाचारों का व्यापक अनुभव उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि राजीव कृष्ण उत्तर प्रदेश पुलिस को किस नई दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
