मुजफ्फरनगर में ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर कथित सात लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि निवेशक की अनुमति के बिना उसके डिमैट खाते में मौजूद शेयर बेचकर पूरी रकम जोखिम भरी ऑप्शन ट्रेडिंग में लगा दी गई। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए संचालित इस नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
मुजफ्फरनगर। ऑनलाइन निवेश और शेयर बाजार में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के बीच मुजफ्फरनगर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने निवेशकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब सात लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में एक टेलीग्राम चैनल संचालक और उससे जुड़े व्हाट्सएप नंबर संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता रजत गौतम ने आरोप लगाया है कि उन्होंने आरोपियों को केवल अपने डिमैट खाते में उपलब्ध लगभग 1.40 लाख रुपये से ट्रेडिंग करने की अनुमति दी थी। इसके लिए उन्होंने 2 जून 2026 को व्हाट्सएप पर स्पष्ट संदेश भी भेजा था कि उनके पुराने शेयरों और पहले से चल रहे निवेश को किसी भी स्थिति में नहीं बेचा जाए।इसके बावजूद आरोपियों ने कथित रूप से उनके डिमैट खाते में रखे करीब सात लाख रुपये मूल्य के शेयर बेच दिए और पूरी रकम निफ्टी पुट ऑप्शन ट्रेडिंग में लगा दी। गलत ट्रेडिंग के चलते निवेश लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया, जिससे उन्हें करीब सात लाख रुपये का नुकसान हुआ।
पीड़ित ने अपनी शिकायत के साथ व्हाट्सएप चैट, टेलीग्राम संदेश, ट्रेडिंग हिस्ट्री, डिमैट खाते का रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य पुलिस को सौंपे हैं। उनका दावा है कि उपलब्ध रिकॉर्ड साफ तौर पर यह साबित करते हैं कि उन्होंने केवल सीमित ट्रेडिंग की अनुमति दी थी, जबकि उनके पुराने निवेश के साथ बिना सहमति छेड़छाड़ की गई।
पुलिस के सामने डिजिटल जांच की बड़ी चुनौतीमामले की जांच कर रही पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की वास्तविक पहचान तक पहुंचना है। टेलीग्राम चैनल, व्हाट्सएप नंबर, ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, डिमैट लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाना होगा कि खातों का संचालन किसने किया और कथित धोखाधड़ी की रकम का प्रवाह किन खातों तक पहुंचा।
यदि आरोपी फर्जी पहचान, वर्चुअल नंबर या तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो जांच और अधिक जटिल हो सकती है।फिलहाल सिविल लाइन थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
