"अशोक बालियान-धर्मेंद्र मलिक: MSP में कानूनी गारंटी जरूरी!
CACP मीटिंग में अशोक बालियान-धर्मेंद्र मलिक: किसानों के लिए जोखिम आधारित लाभ सुनिश्चित

किसान संगठनों ने CACP बैठक में MSP सुधारों पर ठोस सुझाव दिए, कानूनी गारंटी की मांग
नई दिल्ली, 24 फरवरी 2026: खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण से पहले कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) और पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के नेताओं ने किसानों के हितों को मजबूत करने के लिए रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने MSP फॉर्मूले में संरचनात्मक बदलाव, कानूनी संरक्षण और प्रभावी खरीद की गारंटी पर जोर दिया।
बैठक की अध्यक्षता CACP चेयरमैन श्री विजय पॉल शर्मा ने की। इसमें पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन श्री अशोक बालियान और भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री धर्मेंद्र मलिक ने भाग लिया। अन्य प्रमुख सदस्यों में रत्न लाल डागर (सलाहकार), प्रेम चंद (सदस्य), डॉ. सीमा (सलाहकार), विवेक शुक्ला (सलाहकार), दिव्या शर्मा (निदेशक) और सिरीक जॉर्ज (सचिव) शामिल रहे। भारतीय किसान सभा, भारतीय किसान संघ, किसान महापंचायत जैसे कई संगठनों ने भी हिस्सा लिया।
अशोक बालियान के प्रमुख सुझाव
श्री बालियान ने MSP निर्धारण को केवल लागत का मुद्दा न बताते हुए इसे देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय स्थिरता और फसल विविधीकरण से जोड़ा। उन्होंने कहा, “वास्तविक लागत (C2) और कटाई के बाद की लागत (D) के आधार पर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो।”
उन्होंने फसलों के जोखिम के आधार पर लाभ प्रतिशत का सुझाव दिया:
- न्यूनतम सुरक्षा वाली फसलों पर 50% लाभ।
- जोखिम और मूल्य अस्थिरता वाली फसलों पर 60-70% लाभ।
- उच्च जोखिम, नाशवान या रणनीतिक फसलों पर 70-100% लाभ।
धर्मेंद्र मलिक की मांगें: प्रभावी खरीद और नीतिगत सुधार
श्री मलिक ने MSP घोषित फसलों पर प्रभावी खरीद की गारंटी की मांग की। उन्होंने कहा, “जिन फसलों पर MSP घोषित नहीं होता, उनके लिए बाजार हस्तक्षेप योजना को मजबूत किया जाए। क्षेत्रीय लागत अंतर को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक मूल्य निर्धारण हो। आयात-निर्यात नीति MSP के अनुरूप संतुलित हो, ताकि किसानों को नुकसान न हो।”
उन्होंने सरकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसान संगठनों से पूर्व परामर्श पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाएगा।
भाकियू (अराजनैतिक) का प्रेस नोट: 8 ठोस मांगें
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने CACP चेयरमैन को संबोधित प्रेस नोट में वर्तमान चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में किसानों को मंडियों में -35% से -5% तक नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश में धान 1600 रुपये क्विंटल बिक रहा है, जबकि खाद्य तेल और दालों में आयात निर्भरता बढ़ रही है।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- C2 लागत + 100% लाभ पर MSP घोषित हो और इसे कानूनी संरक्षण मिले।
- फसल विविधीकरण के लिए MSP पात्र फसलों की सूची का विस्तार, चावल-गेहूं प्रभुत्व कम हो।
- राज्यवार अधिकतम लागत (मजदूरी, निवेश, जमीन किराया) के आधार पर मूल्य निर्धारण।
- खरीद केंद्रों पर ड्रायर, सफाई पंखे, इलेक्ट्रॉनिक तौल, आकस्मिक भुगतान जैसी सुविधाएं अनिवार्य।
- खरीद के 24 घंटे के अंदर भुगतान सुनिश्चित।
- सस्ते आयात (तिलहन, दलहन) पर रोक, व्यापार नीतियों में स्थिरता।
- थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को ध्यान में रखकर MSP वृद्धि।
- MSP को किसानों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा से जोड़ते हुए न्यायपूर्ण घोषणा।
किसानों की व्यथा और उम्मीद
प्रेस नोट में कहा गया कि बढ़ती लागत, जलवायु संकट और बाजार अस्थिरता के बीच MSP सुधार जरूरी है। संगठन आशा जताया कि CACP इन सुझावों को गंभीरता से लेगा, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा।
यह बैठक MSP नीति में बदलाव की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही है। किसान नेता श्री मलिक ने कहा, “सरकार की यह पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन अमल उतना ही महत्वपूर्ण है।”
निष्कर्ष
MSP बहस का निष्कर्ष: किसानों के हित में सकारात्मक शुरुआत
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की 24 फरवरी 2026 की बैठक ने खरीफ फसलों के MSP निर्धारण में ऐतिहासिक मोड़ लिया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) और पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के नेताओं अशोक बालियान व धर्मेंद्र मलिक ने C2+100% लाभ, कानूनी गारंटी, प्रभावी खरीद और क्षेत्रीय लागत आधारित मूल्य निर्धारण जैसे ठोस सुझाव दिए।
ये मांगें न केवल किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी, बल्कि फसल विविधीकरण, खाद्य सुरक्षा और बाजार स्थिरता को मजबूत करेंगी। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में धान जैसे फसलों के संकट को दूर करने के लिए ये सुझाव महत्वपूर्ण हैं। CACP चेयरमैन विजय पॉल शर्मा की अगुवाई में किसान संगठनों का पूर्व परामर्श पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम है।
आयोग द्वारा इन सिफारिशों को अपनाने से करोड़ों किसानों का जीवन स्तर ऊंचा होगा, जबकि सस्ते आयात और बाजार अस्थिरता पर लगाम लगेगी। कुल मिलाकर, यह बैठक MSP नीति में संरचनात्मक सुधार की दिशा में मजबूत आधार तैयार करती है—किसानों की उम्मीदें अब अमल पर टिकी हैं।
