"Budaun Fraud: Lekhpal Fakes Mom's Death for Property Grab"
“साहब, मैं जिंदा हूं!” — लेखपाल ने जिंदा महिला को दस्तावेज़ों में दिखाया मृत
बदायूं में अजीबोगरीब मामला: “साहब, मैं अभी जिंदा हूं!” — लेखपाल ने महिला को दस्तावेज़ों में बताया मृत, तहसील दिवस में फूटा दर्द
बदायूं। जनपद के सहसवान तहसील में मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस के दौरान उस समय अफसरों सहित मौजूद लोगों में हैरानी फैल गई जब एक महिला अधिकारियों के सामने पहुंचकर बोली —
“साहब, मैं अभी जिंदा हूं!”
महिला ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के लेखपाल ने उसके पति की मृत्यु के बाद न सिर्फ उसकी जमीन बेटे के नाम कर दी, बल्कि सरकारी अभिलेखों में उसे मृत घोषित कर दिया। महिला का कहना है कि लेखपाल और उसके बेटे की मिलीभगत से यह संपूर्ण फर्जीवाड़ा किया गया है।
महिला की पीड़ा: “अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा”
महिला ने अधिकारियों के समक्ष रोते हुए कहा कि उसके पति की मौत के बाद उसे और उसकी बेटी को पूरी तरह बेघर कर दिया गया। बेटा और लेखपाल मिलकर उसकी जमीन हड़प चुके हैं।
महिला ने बताया, “मेरे पति की जमीन करीब एक बीघा थी, लेकिन अब मेरे पास एक इंच भी जमीन नहीं बची। मेरे बेटे ने लेखपाल के साथ मिलकर सारे कागज़ात अपने नाम करा लिए और मुझे घर से भी निकाल दिया।”
लेखपाल पर फोन कॉल से हुई पुष्टि का दावा
महिला ने आगे बताया कि कुछ दिन पहले लेखपाल ने उसे फोन किया और बोला —
“मैं डीएम बदायूं बोल रहा हूं।”
जब महिला ने कहा कि हां, गौरव मेरा लड़का है, तब लेखपाल ने कथित तौर पर उसी जानकारी के आधार पर कागज़ तैयार किए और महिला को मृत दिखा दिया।
तहसील दिवस में अधिकारियों से लगाई गुहार
व्यथित महिला ने डीएम और एसएसपी बदायूं के समक्ष गुहार लगाई कि उसकी जमीन वापस दिलाई जाए और दोषी लेखपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
महिला ने कहा कि पिछले कई महीनों से वह न्याय के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन कोई अधिकारी उसकी नहीं सुन रहा। अब उसने सीधे तहसील दिवस में पहुंचकर अपनी बात DM और SSP के सामने रखी है।
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
महिला की शिकायत सुनने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लेखपाल के कार्यों की जांच के निर्देश दिए हैं। DM कार्यालय ने आश्वासन दिया है कि सत्यापन के बाद दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और महिला को न्याय दिलाया जाएगा।
रिपोर्ट – शिवम जांगिड़, जनपद बदायूं
निष्कर्ष
इस खबर का निष्कर्ष यह है कि बदायूं के सहसवान तहसील में लेखपाल द्वारा जिंदा महिला को मृत दिखाने का मामला सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही को उजागर करता है। फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर संपत्ति हड़पने की यह घटना न केवल एक परिवार की दुर्दशा का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों की जटिलता को भी दर्शाती है।
प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन यह मामला सिस्टम में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि गरीब और असहाय लोग भविष्य में न्याय से वंचित न रहें।
