बहन जी जन्मदिन को नहीं दीं प्राथमिकता, जिला पांचयत चुनाव तक रही बयान बाजी
सहारनपुर। बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का जन्मदिन आज जन कल्याणकारी दिवस के लिए आयोजन किया गया लेकिन पार्टी कार्यकर्ता पदाधिकारी जन्मदिन को भुला कर केवल अपनी बात तक ही सीमित रहे इस दौरान जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की दावेदारी का टिकट पाने वाले उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ भीड़ लेकर पहुंचे इस भीड़ से काफी अर्थव्यवस्था का माहौल देखने को मिला साथ कार्यक्रम के अपराध मिष्ठान वितरण को लेकर आपाधापी का माहौल बन गया।
आज बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती का जन्मदिन जन्म को जनकल्याणकारी दिवस के रूप मनाया गया। मल्हीपुर रोड स्थित एक बैंकट हॉल में आयोजित कार्यक्रम पूरी तरह जनकल्याणकारी दिवस के विपरीत आयोजित किया गया मंच पर अधिकांश लोगों ने कोई सार्थक बात नहीं कि केवल अपने-अपने मन के मुताबिक शेरो शायरी के माध्यम से अपनी अपनी बात रखें जनकल्याणकारी दिवस मनाए जाने का उद्देश्य तथा पार्टी की नीतियों और संगठन मजबूती पर कोई सकारात्मक बात नहीं की गई 2026 में होने वाले जिला पंचायत सदस्य पद को लेकर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे विभिन्न वार्डों से दावेदार भीड़ के साथ आयोजन स्थल पर पहुंचे जिस कारण अव्यवस्थाओं का माहौल उत्पन्न हो गया और सड़कों पर भी जाम लग गया जिस कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा इस आयोजन में बसपा के जमीनी कार्यकर्ता काफी कम दिखाई दिए केवल जिला पंचायत काफा कमादखाइदिए कवला जला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवारी के दावेदारी करने वालों वालों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया शक्ति प्रदर्शन के दौरान निकल गए लंबे चौड़े काफिले के कारण वालों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया शक्ति प्रदर्शन के दौरान निकल गए लंबे चौड़े काफिले के कारण आम जन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा चर्चा है कि शक्ति प्रदर्शन जुलूस में बाइक के माध्यम से पटाखे बजाने का काम भी किया गया। जिसके चलते पार्टी सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री
श्री मायावती के जन्मदिन पर आयोजित जन कल्याणकारी दिवस महेश औपचारिकता बनकर रह गया जिसको लेकर पार्टी कैडर का कार्य करता आयोजन स्थल से निराश होकर वापस लौटा यही नहीं व्यवस्था सही नहीं होने के कारण कार्यक्रम के उपरांत निष्ठान वितरण को लेकर आपाधापी मच गई और व्यवस्था पूरी तरह धराशाई हो गई
आयोजन का निष्कर्ष
सहारनपुर में बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिवस को जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाने का प्रयास उम्मीदवारों की दावेदारी और शक्ति प्रदर्शन में बदल गया।
