अहिल्याबाई घाट ध्वस्तीकरण पर पीएम को 'दूसरा औरंगज़ेब' कहा।
सहारनपुर: कांग्रेस का हंगामा, अहिल्याबाई घाट तोड़ने पर पीएम को ‘दूसरा औरंगज़ेब’ कहा

UP NEWS UPDATE :सहारनपुर।
कांग्रेसजनो ने बनारस में महारानी अहिल्याबाई घाट के नाम से बने प्राचीन घाट को ध्वस्त किए जाने के विरोध में सहारनपुर मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को हिंदुओं की आस्था पर प्रहार बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला और राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
धरने का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष संदीप राणा और महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी ने किया। नेताओं ने कहा कि सरकार जाति और धर्म की राजनीति कर रही है। पहले मस्जिदों को तोड़ा गया और अब हिंदुओं की आस्था से जुड़े स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि बनारस में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित घाट वर्षों पुरानी ऐतिहासिक धरोहर था, जिसे विकास के नाम पर ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह घाट आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास की पहचान था।
उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका घाट का निर्माण वर्ष 1771 मे रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा कराया गया था। इसे तोड़ना इतिहास और आस्था—दोनों के साथ अन्याय है। विकास के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाए जा सकते थे, लेकिन सरकार ने धरोहर को नष्ट करने का रास्ता चुना।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कॉरिडोर परियोजना के नाम पर बनारस में 150 से 200 मंदिर, जिनमें कई 600 वर्ष पुराने थे, ध्वस्त किए गए, लेकिन मीडिया ने इस मुद्दे को जनता के सामने सही ढंग से नहीं रखा।
उन्होंने कहा कि जो सरकार हिंदुओं की भावनाएं भड़का कर सत्ता में आई, वही आज मंदिरों पर बुलडोजर चला रही है। नेताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि इतिहास में औरंगज़ेब पर मंदिर तोड़ने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन आज की सरकार के कार्य उससे भी अधिक गंभीर प्रतीत हो रहे हैं।
कांग्रेस जनों ने प्रधानमंत्री को दूसरा औरंगज़ेब बताया
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उनके समर्थकों पर कार्रवाई की गई, जबकि पूरे हिंदू समाज की शंकराचार्यों में गहरी आस्था है। देश में केवल चार शंकराचार्य हैं और उनके अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
धरने के दौरान नेताओं ने कहा कि जो भी व्यक्ति सरकार से सवाल पूछता है, उसे देशद्रोही या हिंदू विरोधी बताकर मुकदमे लगाए जाते हैं। कांग्रेस ने ऐलान किया कि वह सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर आवाज उठाती रहेगी।
अंत में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे हमेशा धर्म, आस्था और ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा के लिए खड़े रहेंगे और किसी भी कीमत पर मंदिरों व धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे।
निष्कर्ष
सहारनपुर में कांग्रेस का धरना बनारस के अहिल्याबाई होल्कर घाट ध्वस्तीकरण के खिलाफ मजबूत संदेश देता है। आस्था और ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष का ऐलान राजनीतिक तापमान बढ़ाएगा। सरकार को धरोहर संरक्षण और वैकल्पिक विकास पर ध्यान देकर विवाद कम करने की जरूरत है।
