राव केसर सलीम का साहसिक कदम: 26 साल बाद रालोद छोड़ा, चंद्रशेखर आजाद की पार्टी में शामिल
सहारनपुर में भूचाल! रालोद के 26 साल पुराने सिपाही राव केसर सलीम ने थामा चंद्रशेखर का झंडा

सहारनपुर में रालोद को बड़ा झटका! पूर्व जिलाध्यक्ष राव केसर सलीम ने थामा चंद्रशेखर आजाद का दामन.
प्रमुख घटना
सहारनपुर के रोटरी क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के लंबे समय तक सक्रिय नेता राव केसर सलीम ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण करने की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 जनवरी 2026 को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू स्थित चंद्रशेखर आजाद के सरकारी आवास पर उन्होंने पार्टी जॉइन की, जहां सैकड़ों समर्थकों के साथ पटका पहनाकर स्वागत किया गया। यह कदम रालोद के लिए पंचायती चुनावों से पहले राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
जॉइनिंग का कारण
राव केसर सलीम ने बताया कि वे चंद्रशेखर आजाद की विचारधारा, संघर्षपूर्ण नेतृत्व और दबे-कुचले वर्गों के हक की लड़ाई से गहराई से प्रभावित हैं। रालोद में 26 वर्षों (1999 से) की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद गरीब, मजदूर, मजलूम और अल्पसंख्यक वर्गों की समस्याओं को न तो सुना गया, न ही मंच प्रदान किया गया, जिससे उन्हें घुटन महसूस होने लगी। उन्होंने रालोद पर मूल्यों और उसूलों से भटकने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के आदर्शों से प्रेरित होकर वे अब आजाद समाज पार्टी के साथ हैं.
आजाद समाज पार्टी की तारीफ
राव केसर सलीम ने जोर देकर कहा कि आजाद समाज पार्टी सड़क से संसद तक वंचित वर्गों की सशक्त आवाज है, जो सामाजिक न्याय और संविधान के मूल्यों की रक्षा करती है। चंद्रशेखर आजाद जैसे संघर्षशील नेता के नेतृत्व में काम करना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और वंचितों के अधिकारों के लिए कटिबद्ध रहेंगे.
साथ शामिल हुए नेता
राव केसर सलीम के साथ पूर्व जिला उपाध्यक्ष फरमान राव, राव सलीम जजनैर, राव मेहरबान, नानौता नगर पंचायत अध्यक्ष अफजाल खान, गुरु महीपाल दास, पृथ्वीराज, इमरान खान, राज सिंह सहित कई प्रमुख नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए। चंद्रशेखर आजाद ने उनके अनुभव की सराहना करते हुए कहा कि यह पार्टी को और मजबूत करेगा.

निष्कर्ष
राव केसर सलीम के आजाद समाज पार्टी में शामिल होने से सहारनपुर की राजनीति में उल्लेखनीय बदलाव आया है, जो राष्ट्रीय लोकदल को पंचायती चुनावों से पहले बड़ा झटका साबित हो सकता है। चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली यह पार्टी दबे-कुचले वर्गों की आवाज को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जबकि कई अन्य नेताओं के साथ उनका प्रवेश पार्टी को स्थानीय स्तर पर और सशक्त बनाएगा। यह घटना उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण को दर्शाती है।
