DSP तंजील हत्याकांड: हाईकोर्ट ने रेयान को 10 साल बाद दी रिहाई
बिजनौर DSP तंजील हत्याकांड में रेयान हाइकोर्ट से बरी।
UP NEWS UPDATE :एनआईए DSP तंजील हत्याकांड: फांसी की सजा पाए रेयान को हाईकोर्ट ने किया बरी, 10 साल जेल के बाद रिहाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर के सनसनीखेज DSP तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड में फांसी की सजा काट रहे आरोपी रेयान को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने सबूतों के अभाव में निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
घटना का पूरा विवरण
2 अप्रैल 2016 की रात बिजनौर जिले के स्योहारा इलाके में एनआईए के DSP मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना एक शादी समारोह से लौट रहे थे। बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें DSP तंजील पर 24 गोलियां दागी गईं और पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर 33 घाव पाए गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
निचली अदालत का फैसला
एनआईए की लंबी जांच के बाद बिजनौर कोर्ट ने मई 2022 में मुख्य आरोपी गैंगस्टर मुनीर और उसके साथी रेयान को हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जबकि अन्य आरोपी तंजीम, जेनी और रिजवान को बरी कर दिया गया।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
31 मार्च 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेयान की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को गंभीर त्रुटि करार दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य संदेहपूर्ण हैं और ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का गलत आकलन किया। 7 अप्रैल 2016 से जेल में बंद रेयान को सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।
सह-आरोपी मुनीर की मौत
दूसरे मुख्य आरोपी मुनीर की अपील के दौरान 20 नवंबर 2022 को बीएचयू अस्पताल में यूरिन इंफेक्शन से मौत हो चुकी है। मुनीर ने अलीगढ़ में रेलवे मजिस्ट्रेट की सुरक्षा में तैनात सिपाही की राइफल लूटी थी, उसी से तंजील दंपति की हत्या की थी।
केस की समयरेखा
| तारीख | घटना/फैसला |
|---|---|
| 2 अप्रैल 2016 | तंजील दंपति की हत्या |
| मई 2022 | निचली अदालत से फांसी |
| नवंबर 2022 | मुनीर की जेल में मौत |
| 31 मार्च 2026 | हाईकोर्ट से बरी |
निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला बिजनौर DSP तंजील हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण मोड़ है। 10 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रेयान को बरी करना सबूतों के सख्त मूल्यांकन को दर्शाता है। यह केस पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और आतंकी अपराधों पर न्याय की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
