“BKU vs Pollution Team: Chaos at Mahalaxmi Factory”
मुजफ्फरनगर में प्रदूषण जांच पर बवाल! BKU ने टीम पर लगाया मिलीभगत का आरोप
महालक्ष्मी फैक्ट्री में प्रदूषण विभाग की टीम पर गंभीर आरोप, BKU (अराजनीतिक) कार्यकर्ताओं और अधिकारियों में तीखी नोकझोंक
मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर क्षेत्र स्थित महालक्ष्मी फैक्ट्री उस समय चर्चा का केंद्र बन गई जब लखनऊ से आई प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम निरीक्षण के लिए फैक्ट्री पहुँची। निरीक्षण के दौरान माहौल तब गरमा गया जब भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के कार्यकर्ताओं ने विभागीय टीम पर गंभीर आरोप लगाए।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रदूषण विभाग की टीम ने फैक्ट्री से सैंपल लेने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती और महज़ खानापूर्ति की गई। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि टीम फैक्ट्री मालिकों से बंद कमरे में बैठक कर रही थी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिन वाहनों से अधिकारी फैक्ट्री पहुंचे, वे खाली अंदर गए और रुपये से भरे थैले लेकर बाहर निकले।
टीम ने भी लगाए पलटवार आरोप
वहीं, प्रदूषण विभाग की टीम ने BKU कार्यकर्ताओं पर अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने निरीक्षण में व्यवधान डाला और सैंपल लेने से रोका। टीम ने यह भी आरोप लगाया कि RDF (Refuse Derived Fuel) का सैंपल जब लिया जा रहा था, तब कुछ लोगों ने गाड़ी में रखे सैंपल को फाड़ दिया।

पुलिस को दी गई सूचना
स्थिति बिगड़ने पर प्रदूषण विभाग की टीम ने स्थानीय मंसूरपुर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ, हालांकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विभाग द्वारा पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
विभाग का पक्ष
गितेश चंद्रा, प्रदूषण विभाग अधिकारी (मुजफ्फरनगर) ने बताया कि टीम लखनऊ से नियमित निरीक्षण के लिए आई थी। निरीक्षण के दौरान कुछ लोगों ने जानबूझकर बाधा उत्पन्न की और सैंपल को नुकसान पहुँचाया। विभाग इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजेगा।
रिपोर्ट – शिवम जांगिड़, जनपद मुजफ्फरनगर
निष्कर्ष
इस घटना का निष्कर्ष यह है कि मुजफ्फरनगर की महालक्ष्मी फैक्ट्री में प्रदूषण विभाग की जांच प्रक्रिया को लेकर विवाद और अविश्वास का माहौल बन गया है। एक ओर BKU (अराजनीतिक) कार्यकर्ताओं ने विभागीय टीम पर मिलीभगत और खानापूर्ति के आरोप लगाए, वहीं टीम ने कार्यकर्ताओं पर जांच में बाधा डालने और सैंपल नष्ट करने का आरोप लगाया।
इस विवाद से स्पष्ट होता है कि औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय मानकों की जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बना रहे। पुलिस और प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि सत्य सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जा सके
