मुजफ्फरनगर।भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने लखनऊ से आई प्रदूषण विभाग की इंस्पेक्शन टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि टीम ने प्रथम दृष्टया यह स्वीकार किया है कि जलाया जा रहा कचरा RDF नहीं बल्कि MSW (नगरपालिका का ठोस अपशिष्ट) है, इसके बावजूद इसे जलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की जा रही।
भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जब प्रदूषण अधिकारियों के बयान का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें साफ कहा जा रहा है कि यह RDF नहीं MSW है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी व्यक्ति या समूह के जीवन से जुड़ा मामला होता है, तो सर्वोच्च न्यायालय 48 घंटे में सुनवाई करता है, ऐसे में प्रदूषण विभाग जांच रिपोर्ट का बहाना क्यों बना रहा है।
संगठन के अनुसार, लखनऊ से आई टीम ने स्थानीय नागरिकों से बातचीत करने के बजाय होटल वेलविस्ता बाईपास पर औद्योगिक इकाइयों के मालिकों से मुलाकात की। आरोप है कि जब किसान और नागरिक अपनी बात रखने होटल पहुंचे, तब तक उद्योगपति वहां से जा चुके थे।
भाकियू अराजनैतिक के जानसठ तहसील अध्यक्ष अंकित जावला ने बताया कि प्रदूषण विभाग की गाड़ी में मौजूद अधिकारियों से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकारी बिना विस्तृत संवाद किए वाहन से निकल गए और मूलचंद क्षेत्र में चले गए।
अंकित जावला ने टीम में शामिल अभियंता से बातचीत कर कहा कि शहर और आसपास के क्षेत्र के नागरिक प्रदूषित जल, वायु और धुएं से परेशान हैं। औद्योगिक इकाइयों द्वारा RDF के नाम पर नगरपालिका का ठोस कचरा जलाया जा रहा है, जिससे लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने इसे कुछ व्यापारियों के लाभ के लिए नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया।
संगठन के नेता जयवीर ठाकरान ने कहा कि प्रदूषण विभाग को नागरिकों पर आरोप लगाने के बजाय वास्तविक प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रदूषण विभाग की टीम ने नमूने लेकर जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि भाकियू अराजनैतिक ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ऐसी इकाइयों पर तत्काल कार्रवाई कर उन्हें बंद कराया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
