कासगंज में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें थोपने के खिलाफ ‘YUVA’ संगठन और अभिभावकों ने सड़क पर धरना देकर NCERT किताबों की अनिवार्यता की मांग की।
किताबों को लेकर YUVA और अभिभावकों ने किया धरना प्रदर्शन

UP NEWS UPDATE :जनपद कासगंज में निजी स्कूलों द्वारा प्रशासन के आदेशों को धता बताकर अभिभावकों पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें थोपने के खिलाफ आक्रोश उफान पर आ गया है। “यूनिटी फॉर वैल्युएबल एक्शन (YUVA)” संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों अभिभावक सड़क पर उतर आए और अपनी बस्तियों–स्कूलों के चौराहों पर धरना‑प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि स्कूल माफिया और निजी प्रकाशकों की सांठगांठ से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ थोपा जा रहा है।
NCERT किताबों को लेकर आदेश और उपेक्षा
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) जगदीश चंद्र शुक्ल ने 6 मार्च 2026 और 31 मार्च 2026 को लिखित आदेश जारी किए थे कि जनपद के सभी स्कूलों में NCERT पाठ्यक्रम और NCERT की पुस्तकें अनिवार्य रूप से लागू की जाएं। इसके बावजूद कई नामचीन निजी स्कूल इन आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं और अभिभावकों को निजी प्रकाशकों के महंगे किताब‑सेट खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर घरों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
धरना का नेतृत्व और मुख्य मांगें
धरना का नेतृत्व कर रहे “YUVA” संगठन के प्रतिनिधि हरवीर सिंह भारतीय ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन ने दो बार स्पष्ट आदेश दिए, लेकिन कई स्कूल अभी भी सरकारी निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हर विद्यालय के बच्चों के बस्ते में NCERT की सस्ती और मानक किताबें नहीं पहुंचेंगी, आंदोलन थमेगा नहीं। उन्होंने मांग की है कि जनपद के सभी निजी, सहायता‑प्राप्त और सरकारी स्कूलों में NCERT का पूर्ण क्रियान्वयन किया जाए, निजी पुस्तक‑विक्रेताओं के साथ सांठगांठ वाले स्कूलों और बुक‑सेलर्स पर छापेमारी की जाए, और आदेश तोड़ने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना व कानूनी कार्रवाई हो।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और वादा
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रणय सिंह और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) जगदीश चंद्र शुक्ल स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे। DIOS ने स्पष्ट किया कि दो बार लिखित आदेश के बावजूद यदि कोई स्कूल मनमानी करता है तो लिखित शिकायत मिलते ही उसकी मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि प्रशासन शिक्षा के “व्यवसायीकरण” को बर्दाश्त नहीं करेगा, दोषी स्कूलों की जांच कराई जाएगी और शासन के नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।
अभिभावकों की चिंताएं और व्यावहारिक बातें
अभिभावकों का कहना है कि एक ही समय में निजी प्रकाशन की महंगी किताबें खरीदने के बाद NCERT‑आधारित पाठ्यक्रम लागू करना उन्हें बार‑बार रुपये खर्च करने को मजबूर करता है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, अब कक्षा 6 से 12 तक NCERT की किताबें बाजार में उपलब्ध हो गई हैं, जिनकी कीमतें निजी प्रकाशकों की तुलना में काफी कम हैं, जिससे आर्थिक रूप से आराम मिल सकता है। अभिभावकों का आग्रह है कि स्कूल प्रशासन सीधे‑सीधे बच्चों को यही सस्ती, मानक NCERT किताबें उपलब्ध कराएं, न कि बिचौलियों के जरिए महंगे सेट बेचें।
धरना समाप्त होने के बाद भी चेतावनी
फिलहाल प्रशासन के वादे और ज्ञापन स्वीकार करने के बाद “YUVA” संगठन और अभिभावकों ने धरना समाप्त कर दिया है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे पूरी तरह सतर्क हैं; यदि अगले कुछ दिनों में जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है। स्थानीय सरोकार यह भी जता रहे हैं कि यदि प्रशासन इस मसले पर पक्की निगरानी रखता है तो निजी स्कूलों की मनमानी रुक सकती है और शिक्षा वाकई “लूट” से मुक्त हो सकती है।
निष्कर्ष
कासगंज में निजी स्कूलों द्वारा NCERT किताबों के आदेश को नजरअंदाज कर महंगी निजी पुस्तकें थोपने के खिलाफ अभिभावकों और ‘YUVA’ संगठन का आंदोलन सिर्फ एक धरना नहीं, बल्कि शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ जनता की चिंता का संकेत है। इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक प्रशासन द्वारा आदेशों की पारदर्शी निगरानी, शिकायतों की त्वरित सुनवाई और दोषी संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसी ठोस व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक आम अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक दबाव और तनाव झेलना पड़ेगा। अगर प्रशासन इस मसले को गंभीरता से लेकर निजी प्रकाशक–स्कूल–बुक सेलर त्रिकोण की तस्करी‑जैसी प्रथा पर रोक लगाता है, तो शिक्षा सचमुच सस्ती, सुलभ और भ्रष्टाचार‑मुक्त बन सकती है।
