कासगंज गंगा बाढ़: फसलें डूबी, किसान संकट में
कासगंज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से हजारों बीघा पालेज हुई जलमग्न
UP NEWS UPDATE :कासगंज में गंगा उफान से तबाही: हजारों बीघा फसलें जलमग्न, किसान संकट में
कासगंज, 25 मार्च 2026 (रिपोर्टर: जुम्मन कुरैशी): जनपद कासगंज के ब्लॉक गंजडुंडवारा क्षेत्र के कादरगंज गंगा घाट पर गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से किसानों की हजारों बीघा पालेज फसलें जलमग्न हो गई हैं। उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने से तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी और सीताफल (कद्दू) जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर हैं। किसानों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा गया है।
किसानों का भारी नुकसान: नालियां बह गईं
किसान प्रेमपाल: “मेरी काफी कृषि भूमि गंगा के पानी में डूब गई। पालेज की 100 से अधिक नालियां पूरी तरह बह गई हैं। पानी भरने से फसल बर्बाद हो गई। मेहनत एक साल की बर्बाद हो गई।”
किसान रामकुमार: “मैंने सवा सौ पालेज नालियों में फसल लगाई थी। ऊपर से छोड़े गए पानी ने सब कुछ तबाह कर दिया। अब आर्थिक संकट से जूझना पड़ेगा। पटियाली तहसील के किसान साल में सिर्फ एक-दो फसलों पर निर्भर रहते हैं।”
किसानों में चिंता और आक्रोश व्याप्त है। आसपास के कई गांव प्रभावित हुए हैं, जहां पालेज की नालियां टूटकर बह गईं।
समाजसेवी की मांग: तत्काल जलस्तर नियंत्रण
एडवोकेट व समाजसेवी अब्दुल हफीज गांधी: “गंगा बैराज हरिद्वार के मुख्य अभियंता को पत्र लिखा है। अतिरिक्त पानी को सीधे गंगा में छोड़ने के बजाय नहरों में डाला जाए। सिंचाई विभाग से जलस्तर घटाने और किसानों को राहत की मांग की है। प्रशासन गंभीरता दिखाए।”
गांधी ने कहा कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं, प्रबंधन की लापरवाही है। तत्काल कदम उठाकर फसलों को बचाया जा सकता है।
प्रशासन की चुप्पी, किसान राहत की प्रतीक्षा में
सिंचाई विभाग ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। किसान सरकार से मुआवजे और बांध मरम्मत की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र में भय का माहौल है, क्योंकि जलस्तर और बढ़ सकता है।
संपर्क: 9457667357 / 8433232864
निष्कर्ष
कासगंज में गंगा का अचानक उफान किसानों की हजारों बीघा पालेज फसलों को निगल गया है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया। अब्दुल हफीज गांधी की मांग के अनुसार सिंचाई विभाग को तत्काल जलस्तर नियंत्रित करना होगा। प्रशासन से मुआवजा और राहत की उम्मीद बंधी है।
