कानपुर: पार्षद का गंजा विरोध, जनता की खून से फरियाद
सत्ता की बेरुखी के बीच, पार्षद ने अपने बालों की आहुति देने का बनाया मन
कानपुर नगर निगम में चल रहा विवाद अब राजनीतिक बयानबाज़ी से निकलकर सत्ता बनाम जनप्रतिनिधि की खुली लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
महापौर और उनके बेटे को लेकर उठे सवालों के बीच पार्षद पवन गुप्ता नगर निगम के गेट पर अनोखे विरोध को लेकर पहुंचे, जिसने भाजपा संगठन और नगर निगम—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
पवन गुप्ता ने ऐलान किया कि जब न पार्षदों की सुनी जा रही है और न जनता की, तो वह अपने सिर के बाल तक आहुति देने को तैयार हैं। नगर निगम गेट के सामने गंजा होने की जिद पर अड़े पवन को समझाने की तमाम कोशिशें नाकाम होती रहीं। यह विरोध सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अंदर ही अंदर सुलग रहे असंतोष का सार्वजनिक विस्फोट था।
मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब भाजपा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं को खुद मैदान में उतरना पड़ा। लंबी मान-मनौव्वल के बाद पवन गुप्ता वहां से हटे जरूर, लेकिन सवाल छोड़ गए—
क्या पार्टी नेतृत्व को विरोध सुनाई देता है, या सिर्फ सत्ता की भाषा समझ आती है?
इसी बीच नगर निगम के बाहर एक और तस्वीर ने सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर कर दी। संत लाल हाते क्षेत्र के लोग अपनी पीड़ा खून से लिखे पत्र में लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि जब कागज़ी अर्ज़ियों का असर नहीं हुआ, तो खून ही आख़िरी दस्तावेज़ बन गया।
नगर निगम गेट पर एक तरफ गंजे होने को तैयार पार्षद और दूसरी तरफ खून से लिखी फरियाद—यह दृश्य बताता है कि कानपुर की राजनीति अब विकास नहीं, विश्वास के संकट से गुजर रही है।
अब सवाल सिर्फ मेयर और पार्षदों के टकराव का नहीं है। सवाल यह है कि
क्या सत्ता की दीवारें इतनी ऊंची हो चुकी हैं कि आवाज़ सिर्फ तब सुनी जाती है, जब वह कुर्बानी की हद तक पहुंच जाए?
निष्कर्ष
कानपुर नगर निगम का विवाद अब सत्ता और जनप्रतिनिधियों के बीच खुली टक्कर बन चुका है। पार्षद पवन गुप्ता का गंजा होने का विरोध व जनता का खून से लिखा संदेश सिस्टम की उदासीनता को उजागर करता है। यह घटना विकास से अधिक विश्वास संकट की ओर इशारा करती है।
