पुलिस चौकी टैंक लीक: नाले का जहर पेयजल में, इंदौर में 9 मौतें!
इंदौर जल संकट: नाले के पानी में मिले बैक्टीरिया ने ली 9 जिंदगियां, भगीरथपुरा में दहशत!

भगीरथपुरा में फैली दहशत: 9 मौतें, 200 से अधिक अस्पताल में
इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल पीने से डायरिया और उल्टी का प्रकोप फैला, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 200 से अधिक लोग 27 अस्पतालों में भर्ती हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसनी ने बताया कि महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पेयजल के नमूनों में नाले के पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया जैसे वाइब्रियो कोलेरा, शिगेला और ई. कोलाई की पुष्टि हुई है।
25 दिसंबर से पानी में बदबू की शिकायतें आने लगी थीं, लेकिन समस्या बढ़कर सोमवार से अस्पतालों में मरीजों की भारी संख्या पहुंची।
दूषित पानी का कारण: पुलिस चौकी का शौचालय बना विलेन
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि स्थानीय पुलिस चौकी पर बने शौचालय का सेप्टिक टैंक ठीक से नहीं बना था, जिससे गंदा पानी रिसकर मुख्य पेयजल पाइपलाइन में घुस गया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि पाइपलाइन में लीकेज से सीवेज मिक्स हो गया; अब पूरे इलाके की पाइपलाइन जांच की जा रही है और साफ पानी पहुंचाया गया है।
1714 घरों में 8571 लोगों का घर-घर सर्वे कर 338 हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर पर ही दवा दी गई।
सीएम मोहन यादव की कार्रवाई: मुआवजा और आपात उपाय
मुख्य मंत्री मोहन यादव ने इसे “आपातकालीन स्थिति” बताते हुए अस्पतालों का दौरा किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया।
प्रभावित परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए गए; शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी चेक वितरित किए, हालांकि उनके बयान पर विवाद हुआ जिसके लिए उन्होंने माफी मांगी।
एनएचआरसी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एमपी सरकार को नोटिस जारी किया, क्योंकि शिकायतों के बावजूद पहले कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बैक्टीरिया का खतरा: लक्षण और बचाव के उपाय
ये बैक्टीरिया गंभीर पेट संक्रमण पैदा करते हैं, जिसमें तेज डायरिया, उल्टी और बुखार मुख्य लक्षण हैं; कमजोर इम्यून वाले बच्चे, बुजुर्ग सबसे खतरे में।
अधिकारी सलाह दे रहे हैं कि पानी उबालकर पिएं, घरेलू फिल्टर इस्तेमाल करें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इंदौर, जो 8 साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर है, इस घटना से सबक लेते हुए पूरे राज्य के लिए एसओपी तैयार करेगा।

सीवेज का पीने के पानी में मिश्रण: मुख्य कारण
पुलिस चौकी के शौचालय का सेप्टिक टैंक ठीक से नहीं बना था, जिससे गंदा पानी रिसकर मुख्य पेयजल पाइपलाइन में घुस गया।
पाइपलाइन में लीकेज होने से सीधा सीवेज मिक्स हो गया, जो भगीरथपुरा इलाके के 1714 घरों को प्रभावित कर गया।
जांच रिपोर्ट की पुष्टि
लैब टेस्ट में नमूनों से वाइब्रियो कोलेरा, ई. कोलाई जैसे नाले वाले बैक्टीरिया मिले, जो सेप्टिक टैंक लीक का सबूत हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने पुष्टि की कि टैंक का खराब निर्माण ही प्राथमिक वजह है, अब पाइपलाइन रिपेयर और टैंक सुधार हो रहा है
निष्कर्ष
इंदौर के भगीरथपुरा जल संकट की जड़ पुलिस चौकी के खराब सेप्टिक टैंक में निहित है, जिसने सीवेज को पीने के पानी में मिलाकर 9 मौतें और सैकड़ों बीमारियां पैदा कीं।
प्रशासन की त्वरित जांच और कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में आ रही है, लेकिन यह घटना जल सुरक्षा मानकों की कमजोरी उजागर करती है।
भविष्य में पाइपलाइन निरीक्षण और टैंक रखरखाव पर सख्ती से ऐसी त्रासदी रोकी जा सकती है।
