भाकियू मलिक ने कृषि मंत्री से की अहम मुलाकात! आलू निर्यात नीति व गन्ना प्रजाति पर मांग।
आलू के गिरते दाम और गन्ना प्रजातियों के संकट को लेकर भाकियू प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने केंद्रीय कृषि मंत्री से की मुलाकात

UP NEWS UPDATE :भाकियू प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक की कृषि मंत्री से मुलाकात: आलू निर्यात नीति और गन्ना प्रजाति संकट पर बड़ा आग्रह
नई दिल्ली, 6 मार्च 2026: भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से कृषि मंत्रालय में महत्वपूर्ण मुलाकात की। मुलाकात में आलू के गिरते दामों और उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की प्रजाति समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
आलू उत्पादन से भरा बाजार, किसान परेशान
देश में इस वर्ष आलू उत्पादन 61 मिलियन मीट्रिक टन होने से मंडी भाव 6-7 रुपये/किलो तक गिर गए हैं। लागत मूल्य 12 रुपये/किलो होने के बावजूद किसान घाटे में हैं।
मुख्य मांगें:
- आलू को निर्यात के लिए “फ्री कैटेगरी” घोषित करें।
- MEP या मात्रा सीमा न लगाएं।
- नेपाल, बांग्लादेश, UAE में निर्यात बढ़ाने हेतु पहल।
- FPO को परिवहन/पोर्ट रियायत, फाइटोसैनेटरी प्रमाणपत्र 72 घंटे में।
गन्ना प्रजाति Co 0238 का संकट, नई किस्मों की जरूरत
उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय Co 0238 रेड रॉट और टॉप बोरर से नष्ट हो चुकी। नई किस्में कम पैदावार वाली, जंगली जानवर नुकसान कर रहे। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर आदि में 10-15% किसान पॉपलर की ओर रुख कर चुके। चीनी मिलें मार्च में ही पेराई समाप्त कर रही हैं।
समाधान सुझाव:
- कोयंबटूर इंस्टीट्यूट के करनाल सेंटर की CO 20016 और CO 21012 का शीघ्र विमोचन।
- परीक्षण पूर्ण, उच्च पैदावार और शुगर रिकवरी वाली ये किस्में Co 0238 से बेहतर।
मंत्री का सकारात्मक रुख
मंत्री चौहान ने मुद्दों को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने का वादा किया। भाकियू ने पत्र सौंपे, जिसमें किसानों की आय वृद्धि पर जोर दिया।
संपर्क: धर्मेंद्र मलिक, 9219691168
निष्कर्ष
भाकियू प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आलू के गिरते दामों पर निर्यात प्रोत्साहन नीति और गन्ना प्रजाति Co 0238 के संकट पर नई किस्मों CO 20016, CO 21012 के विमोचन की मांग की। मंत्री ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। ये कदम उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों की आय बढ़ाने और कृषि संकट दूर करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
