बांग्लादेश में हिंदू नरसंहार: राजनीतिक साजिश का शिकार!
बांग्लादेश में लगातार कट्टरपंथी मुस्लिम जिहादियों के द्वारा हिंदुओं की हत्या की जा रही है

बांग्लादेश में हिंदुओं पर कट्टरपंथी हमले: हिंसा की भयावह सच्चाई
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद हिंदू समुदाय पर लगातार हमले बढ़े हैं, जिसमें घरों पर आगजनी, मंदिरों पर तोड़फोड़ और हत्याएं शामिल हैं। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 तक हिंदुओं के खिलाफ 71 ईशनिंदा के मामले दर्ज हुए हैं।
प्रमुख घटनाएं
पीरोजपुर जिले के डुमरीताला गांव में एक हिंदू परिवार के पांच घरों को आग लगा दी गई, जिसे अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमला माना जा रहा है। दिसंबर 2025 में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास और बाजेंद्र बिस्वास की फैक्ट्री में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा, 2024 अगस्त से अब तक 23 हिंदुओं की हत्या और 152 मंदिरों पर हमले दर्ज हुए हैं।
यौन हिंसा का बढ़ता खतरा
अल्पसंख्यक महिलाओं और बच्चों पर दुष्कर्म के मामले महामारी की तरह फैल रहे हैं, जिसमें 87 प्रतिशत पीड़ित नाबालिग लड़कियां हैं। बांग्लादेश अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस (HRCBM) ने अंतरिम सरकार पर कानून-व्यवस्था नियंत्रण में नाकामी का आरोप लगाया है। कई मामलों में सिरविहीन शव मिलने की खबरें सामने आई हैं।
भारत में प्रतिक्रिया
दिल्ली सहित कई शहरों में हिंदू संगठनों ने बांग्लादेशी उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। ब्रिटिश सांसदों ने यूनुस सरकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हिंदुत्व से जुड़े सभी मुद्दों को बेहद गंभीरता से उठाने वाले स्वामी यशवीर महाराज ने बांग्लादेश पर बयान देते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ले आम किया जा रहा है और भारत में मुस्लिम समाज का एक वर्ग इसके खिलाफ एक शब्द बोलने को तैयार नहीं बल्कि उन कट्टरवादी जेहादियों के पक्ष में ही बोलते हैं!
स्वामी जी ने इस पर हिंदुओं से निवेदन किया है की ठोस निर्णय लें, ऐसे लोगों के खिलाफ सड़कों पर आना पड़ेगा और इनका सामाजिक आर्थिक बहिष्कार करना पड़ेगा और जो भी बांग्लादेशी यहां रह रहा है उन्हें पुलिस को सौपना पड़ेगा, सब काम सरकार नहीं कर सकती कुछ काम स्वयं भी करने पड़ते हैं!!
निष्कर्ष
बांग्लादेश में हिंदुओं पर जारी हिंसा राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी समूहों की साजिश का परिणाम है। अंतरिम सरकार की कमजोरी ने स्थिति बिगाड़ी है। भारत को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए दबाव बनाना चाहिए।
