अलीगढ़: आईएपी ने घुटकी-मोबाइल के खतरों पर खोला मोर्चा
अलीगढ़: घुटकी-मोबाइल से नवजातों पर संकट, आईएपी करेगी माता-पिता को जागरूक
अलीगढ़: घुटकी-मोबाइल से बच्चों का भविष्य खतरे में, आईएपी ने खोला मोर्चा
अलीगढ़ में आईएपी इकाई ने नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर घुटकी के हानिकारक असर को लेकर प्रेस वार्ता की। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों ने माता-पिता को जागरूक करते हुए कैंप लगाने का ऐलान किया।
प्रेस वार्ता के प्रमुख बिंदु
आईएपी अलीगढ़ इकाई ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में शहर के सभी वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं से जुड़ी समस्याओं पर विचार व्यक्त किए। जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर यूसुफ ने बताया कि नवजात बच्चों को घुटकी देना अत्यंत हानिकारक है। इससे बच्चों की आंतें फट सकती हैं और मेडिकल कॉलेज में आए दिन ऐसे केस इलाज के लिए आते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बंसल ने कहा कि बच्चों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से आईएपी विभिन्न इलाकों में जागरूकता कैंप लगाएगा। डॉ. वीके द्विवेदी ने चेतावनी दी कि जन्म से 2 साल तक बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। मोबाइल देखने से बच्चे बोलना नहीं सीख पाते, ऐसी समस्याएं आम हो रही हैं।
आगामी कैंप का ऐलान
गंभीर बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए आईएपी 22 फरवरी को पन्नालाल अस्पताल में विशेष कैंप आयोजित करेगा। इसमें वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ निःशुल्क परामर्श देंगे। आईएपी अलीगढ़ इकाई बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लगातार इस तरह के कार्यक्रम चलाएगी।
निष्कर्ष
यह आईएपी की पहल बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घुटकी-मोबाइल जैसे खतरे से जागरूक कर माता-पिता को सशक्त बनाना समाज के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी देगा।
