एअर इंडिया फ्लाइट 855: 1 जनवरी को 213 जिंदगियां लील गया समुद्र!
एक जनवरी का काला इतिहास: 213 यात्रियों के साथ समुद्र में समा गया था एअर इंडिया का विमान

एक जनवरी 1978 को एअर इंडिया की उड़ान 855 ‘सम्राट अशोक’ अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सभी 213 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए। यह हादसा मुंबई के सांताक्रूज़ हवाई अड्डे से टेकऑफ के महज 101 सेकंड बाद हुआ।
विमान और उड़ान का विवरण
- विमान बोइंग 747-237B था, जिसका पंजीकरण VT-EBD था और नाम सम्राट अशोक रखा गया था; यह एअर इंडिया को अप्रैल 1971 में पहला 747 विमान मिला था।
- उड़ान मुंबई से दुबई जा रही थी, जिसमें 190 यात्री और 23 चालक दल के सदस्य सवार थे, ज्यादातर भारतीय नागरिक।
- टेकऑफ रनवे 27 से शाम 20:12 बजे (स्थानीय समय) हुआ, नियंत्रण कक्ष ने 8000 फीट ऊंचाई पर चढ़ने और 2400 फीट छोड़ने पर रिपोर्ट करने को कहा।
दुर्घटना की घटनाक्रम
- टेकऑफ के एक मिनट बाद विमान हल्के दाएं मोड़ में अरब सागर की ओर मुड़ा, लेकिन एटीट्यूड डायरेक्टर इंडिकेटर (ADI) ने गलत दाएं झुकाव दिखाया।
- कैप्टन मदन लाल कुकर (51 वर्षीय, 1956 से एअर इंडिया में) ने कहा, “यहां क्या हुआ, मेरा उपकरण…”, सह-पायलट इंदु विरमानी (43 वर्षीय) ने कहा, “मेरा भी उल्टा हो गया है, ठीक लग रहा है।”
- फ्लाइट इंजीनियर ने अंतर नोटिस किया, लेकिन कैप्टन बाएं की ओर झुकाव जारी रखा, जो 108 डिग्री तक पहुंच गया; विमान 2000 फीट से नीचे गिरा और 35-40 डिग्री नाक नीचे अरब सागर में 3 किमी दूर क्रैश हो गया।
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कारण और जांच
- जांच में पाया गया कि कैप्टन को ADI की खराबी के कारण विमान की स्थिति का गलत अंदाजा हुआ, अन्य उपकरणों पर भरोसा न करने से मानवीय त्रुटि हुई।
- को-पायलट ने उपकरण निगरानी न की; विस्फोट या तोड़फोड़ के सबूत नहीं मिले, कई दिनों तक समुद्र में मलबा खोजा गया।
- यह भारत का सबसे घातक विमान हादसा था जब तक 1996 का चारखी दादरी मध्य-हवाई टक्कर न हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों और तत्काल प्रतिक्रिया
- बंध्रा तट के निवासियों ने विस्फोट देखा, विमान दो टुकड़ों में बंटा; समुद्र तट होटलों में लोग मेज हिलने महसूस कर रहे थे।
- रडार पर 4.5 मील तक ट्रैक हुआ, संपर्क टूट गया; सुबह तक कोई जीवित नहीं मिला, नौसेना ने खोजी।
- हादसे ने एअर इंडिया को झकझोर दिया, पायलट प्रशिक्षण और उपकरण सुरक्षा पर जोर बढ़ा।
निष्कर्ष
एक जनवरी 1978 को एअर इंडिया फ्लाइट 855 का अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त होना विमानन इतिहास का दर्दनाक पन्ना है, जिसमें 213 लोग खो गए। उपकरण खराबी और मानवीय त्रुटि ने इस त्रासदी को जन्म दिया। यह घटना सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की याद दिलाती है।
