🔥 हिंदू परंपरा पर हमला? मंत्री रेगुपति का बड़ा ऐलान – SC में अपील, दीपम रस्म पर लगेगी रोक!

तमिलनाडु के थिरुप्परंकुंद्रम पर्वत पर कार्तिगई दीपम (दीपा) जलाने को लेकर उठे विवाद पर अब राजनीतिक और कानूनी टकराव तेज हो गया है। राज्य के विधि मंत्री एस. रेगुपति ने साफ कहा है कि तमिलनाडु सरकार और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्त (HR&CE) विभाग मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे।
मामला क्या है?
- मदुरै के निकट स्थित प्रसिद्ध मुरुगन मंदिर वाले थिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर हर साल कार्तिगई दीपम के मौके पर पारंपरिक रूप से दीप जलाने की रस्म होती है।
- विवाद इस बात को लेकर उठा कि दीप पहाड़ी के जिस प्राचीन पत्थर के खंभे (दीपथून) पर जलाया जाए, वह दरगाह के पास स्थित है या उसे केवल ऊंचाई पर स्थित उच्छिपिल्लैयार मंदिर क्षेत्र तक सीमित रखा जाए।
हाईकोर्ट का अहम फैसला
- मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने हाल में दिए आदेश में याचिकाकर्ताओं को थिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के स्तंभ (दीपथून) पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दे दी।
- दो जजों की पीठ ने राज्य सरकार, दरगाह प्रबंधन, पुलिस और तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की अपीलें खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका महज “काल्पनिक डर” है और इसके नाम पर धार्मिक अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता।
सरकार का रुख और मंत्री रेगुपति का बयान
तमिलनाडु के विधि मंत्री एस. रेगुपति ने मीडिया से बातचीत में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को “स्थापित कानून के विरुद्ध” करार दिया और कहा कि सरकार इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी।
रेगुपति ने कहा कि राज्य सरकार और HR&CE विभाग दोनों इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे, क्योंकि सरकार को परंपराओं, सभी समुदायों के हित और कानून-व्यवस्था तीनों की रक्षा करनी है।

सरकार की मुख्य दलीलें
- सरकार का तर्क है कि दरगाह के समीप संवेदनशील स्थान पर अचानक परंपरा में बदलाव और दीप जलाने की अनुमति से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने का खतरा है, इसलिए प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने पड़े।
- राज्य का यह भी कहना है कि विवादित स्थान पर दीप जलाने की परंपरा को लेकर पर्याप्त ऐतिहासिक-धार्मिक प्रमाण नहीं हैं, जबकि प्रशासन पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
अदालतों में कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि
- पहले एकल न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देते हुए दीपथून पर दीप जलाने की अनुमति दी और जिला प्रशासन के लगाए प्रतिबंधात्मक आदेश को रद्द कर दिया, साथ ही पुलिस को सुरक्षा देने का निर्देश दिया।
- राज्य सरकार तथा अन्य पक्षों ने इसे चुनौती देकर अपील दायर की, लेकिन दो जजों की पीठ ने भी एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि प्रशासन ने बिना ठोस आधार के सुरक्षा का हवाला देकर आदेशों का पालन नहीं किया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
- मंत्री रेगुपति के सुप्रीम कोर्ट जाने के ऐलान के बाद विपक्षी दलों, खासकर भाजपा ने राज्य सरकार पर “हिंदू भावनाओं के खिलाफ काम करने” के आरोप लगाए, जबकि सत्तारूढ़ डीएमके का कहना है कि सरकार सभी समुदायों के अधिकारों और शांति के लिए कदम उठा रही है।
- कुछ पूर्व जजों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि ऐसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर नए आचरण या परंपराएँ गढ़ने में अदालतों और सरकार दोनों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि साम्प्रदायिक तनाव भड़कने की स्थिति न बने।
आगे क्या?
- मंत्री रेगुपति के अनुसार, राज्य सरकार बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग करेगी और कार्तिगई दीपम रस्म को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश चाहेंगी।
- अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां से यह तय होगा कि थिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की अंतिम व्यवस्था क्या होगी और उसमें राज्य सरकार तथा धार्मिक संस्थाओं की भूमिका कितनी होगी।
निष्कर्ष
थिरुप्परंकुंद्रम दीपम विवाद का मामला अभी सुलझा नहीं है और सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। तमिलनाडु सरकार के विधि मंत्री एस. रेगुपति ने 6-7 जनवरी 2026 को दोहराया कि राज्य तथा HR&CE विभाग हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेंगे।
वर्तमान स्थिति
- मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 6 जनवरी 2026 को एकल जज के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें दीपथून पर दीप जलाने की अनुमति दी गई।
- सरकार ने कानून-व्यवस्था की आशंकाओं को “काल्पनिक” बताने वाले हाईकोर्ट फैसले को “कानूनी रूप से गलत” करार दिया और परंपराओं में बदलाव न करने पर जोर दिया।
राजनीतिक विवाद
- मंत्री रेगुपति के हाईकोर्ट पर टिप्पणियों से भाजपा भड़क गई, जिसने उनके इस्तीफे की मांग की और डीएमके सरकार पर हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
- विपक्षी नेता नारायणन थिरुपति ने रेगुपति को न्यायपालिका के प्रति असम्मानजनक बयान देने का दोषी ठहराया।
