भारत ने चीन के भारत-पाक सीजफायर मध्यस्थता दावे को सिरे से खारिज किया: “कोई तीसरा पक्ष नहीं!”
ट्रंप के बाद चीन का फर्जीवा: भारत ने ठुकराया मई सीजफायर मीडिएशन क्लेम!

चीन के मध्यस्थता दावे पर भारत का करारा जवाब: “पाकिस्तान ने ही युद्धविराम मांगा, कोई तीसरा पक्ष नहीं!”
ऑपरेशन सिंदूर का पूरा संदर्भ
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दावा किया कि चीन ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि चीन ने वैश्विक विवादों में मध्यस्थता की, जिसमें भारत-पाक तनाव शामिल है।
भारत सरकार के आधिकारिक स्रोतों का स्पष्टीकरण
भारतीय सरकार के स्रोतों ने एनडीटीवी को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई। पाकिस्तान ने भारत के डीजीएमओ से युद्धविराम की अपील की, जिसे द्विपक्षीय स्तर पर स्वीकार किया गया। न्यू दिल्ली का रुख हमेशा साफ रहा: भारत-पाक मुद्दों में तीसरे पक्ष का कोई हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं।
शिमला समझौते की नींव पर द्विपक्षीयता
- 1972 के शिमला समझौते के अनुसार सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं; 10 मई को डीजीएमओ स्तर पर सीजफायर तय हुआ।
- ट्रंप के बाद चीन का यह दावा भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाने जैसा माना जा रहा है।
- पाकिस्तान ने चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया, फिर भी चीन मध्यस्थता का श्रेय ले रहा है।
रणनीतिक निहितार्थ
यह विवाद दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को उजागर करता है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि शांति द्विपक्षीय प्रयासों से ही बनेगी, बाहरी दखलंदाजी अस्वीकार्य

निष्कर्ष
चीन मध्यस्थता दावे का निष्कर्ष
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर युद्धविराम में चीन की मध्यस्थता के दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने ही डीजीएमओ स्तर पर सीजफायर मांगा था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं।
मुख्य बिंदु
- शिमला समझौते के अनुरूप सभी मुद्दे द्विपक्षीय; बाहरी हस्तक्षेप अस्वीकार्य।
- ट्रंप के बाद चीन का यह दावा भारत की संप्रभुता पर प्रहार जैसा।
भारत की रणनीतिक स्थिति
नई दिल्ली का रुख अडिग रहेगा कि भारत-पाक संबंधों में तीसरे पक्ष का कोई स्थान नहीं, जो दक्षिण एशिया में शांति के लिए द्विपक्षीय संवाद पर जोर देता है।
