कन्नौज में मंत्री असीम अरुण के कार्यक्रम में देरी से गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने कानपुर–कन्नौज मार्ग पर जाम लगा कर जिला प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बिग ब्रेकिंग कन्नौज-अपने मंत्री के अपमान में भाजपा कार्यकर्ताओं का रोड जाम कर बड़ा हंगामा,
कन्नौज: मंत्री के अपमान से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं का जमकर जाम और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
कन्नौज। उत्तर प्रदेश के जनपद कन्नौज में भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने मंत्री असीम अरुण के अपमान को लेकर जमकर जनआंदोलन किया, जिसके चलते कन्नौज–कानपुर मार्ग पर घंटों तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही और माहौल तनावपूर्ण हो गया। कार्यकर्ताओं ने डीएम, एसडीएम और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और एडीएम वैशाली को हटाने सहित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग रखी।
कार्यक्रम में अधिकारियों की देरी से भड़की आग
घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के रोमा स्मार्ग स्थित कार्यक्रम स्थल से जुड़ी है, जहां हाल ही में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण एक औपचारिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। अनुसार व्यवस्था तय थी कि जिलाधिकारी, एडीएम और एसडीएम मंच पर मंत्री के समक्ष उपस्थित होंगे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
मंत्री ने जैसे ही मंच पर पहुंचे, जिला प्रशासन ने घोषणा की कि जब तक डीएम नहीं आते, कार्यक्रम शुरू नहीं होगा। बाद में पता चला कि आला अधिकारी तय समय से लगभग 45 मिनट देरी से पहुंचे, जिस कारण असीम अरुण नाराज हो गए और कार्यक्रम छोड़कर चले गए। इस पूरी घटना को भाजपा कार्यकर्ताओं ने “मंत्री का जानबूझकर अपमान” बताया।
रोड जाम और जमकर नारेबाजी
आला अधिकारियों की लेटलतीफी और उनके नहीं आने पर मंत्री का निर्णय लेकर कार्यक्रम त्यागना देखकर भाजपा कार्यकर्ता उत्तेजित हो गए। उन्होंने कन्नौज–कानपुर मार्ग पर जाम लगा दिया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए और “डीएम–एसडीएम चोर हैं”, “जिला प्रशासन मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए।
इस दौरान कार्यकर्ताओं का ध्यान अधिकतर एडीएम वैशाली की तरफ था, जिन पर आरोप लगा कि वे अधिकारियों में से थीं और देरी के लिए जिम्मेदार थीं। इसी वजह से भाजपाइयों ने एडीएम वैशाली को हटाने और ऐसे “लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई” की मांग पर अड़े रहे।
मंत्री के समझाने के बावजूद नहीं थमा जाम
मंत्री असीम अरुण के कार्यक्रम से जाने के बाद भी जाम तत्काल नहीं हटा। देर शाम तक भाजपा कार्यकर्ता सड़क पर ही डटे रहे, जिसके कारण स्थानीय ट्रैफिक लंबे समय तक प्रभावित रहा। बाद में पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने वार्ता के माध्यम से भीड़ को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बिना वे सड़क नहीं छोड़ेंगे।
इस घटना को लेकर जनपद के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि जब केंद्रीय व राज्य मंत्रियों का ही इस तरह “प्रोटोकॉल उल्लंघन” किया जाए, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता के साथ क्या व्यवहार होता होगा, यह एक बड़ा सवाल है।
मामले के बाद क्या हुआ?
कार्यक्रम में हुई देरी और अनावश्यक इंतजार के बाद मंत्री असीम अरुण ने डिजिप (डीएम) को एक पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने प्रोटोकॉल का उल्लंघन और अनुशासनहीनता से संतुष्ट नहीं होने की बात स्पष्ट करते हुए अधिकारियों से समय पर उपस्थित होने और गंभीरता बरतने की अपील की। यह पूरी घटना एक तरफ जहां अधिकारियों की लेटलतीफी और प्रोटोकॉल व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखा रही है कि राजनीतिक कार्यकर्ता अपने नेताओं के साथ होने वाले अपमान को आसानी से माफ नहीं करने वाले हैं।
निष्कर्ष
इस घटना का निष्कर्ष यह है कि कन्नौज में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के सरकारी कार्यक्रम में आला अधिकारियों की 45 मिनट की देरी और उपस्थित न होने को लेकर भाजपा कार्यकर्ता इतने नाराज हुए कि उन्होंने कानपुर–कन्नौज मार्ग पर जाम लगा कर जिला प्रशासन और एडीएम वैशाली समेत लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जमकर हंगामा किया। यह पूरी घटना न केवल प्रशासनिक अनुशासन और प्रोटोकॉल पर सवाल खड़ा कर रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि राजनीतिक कार्यकर्ता अपने नेताओं के साथ होने वाले अपमान की घटनाओं को जल्दी माफ नहीं करते और इसका विरोध खुले आंदोलन के रूप में करते हैं।
