वैध निर्माण से बुजुर्ग विधवा की जान पर बनी, जीडीए सोता हुआ?
UP NEWS UPDATE: गाजियाबाद। दिल्ली से सटे साहिबाबाद के मैन श्याम पार्क (गली नंबर-2, ज़ोन-7) में इन दिनों डर और असुरक्षा का माहौल है। यहाँ एक कथित बिल्डर द्वारा शासन-प्रशासन के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण की वजह से न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि पड़ोस में रहने वाली एक 75 वर्षीय बीमार बुजुर्ग महिला का जीवन भी दांव पर लग गया है।
सरकारी खंभों पर भी कब्जा स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि इस निर्माण में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। बिल्डर ने मकान का चज्जा (Balcony) करीब 4 से 5 फीट तक बाहर निकाल दिया है। हद तो तब हो गई जब निर्माण के दौरान बिजली के सरकारी खंभों तक को नहीं बख्शा गया। तारों के इतने करीब निर्माण होने से कभी भी कोई बड़ा अग्निकांड या जानलेवा हादसा हो सकता है।
इस अवैध निर्माण की सबसे भारी कीमत एक लाचार विधवा महिला को चुकानी पड़ रही है। पीड़िता के पुराने मकान की दीवारें नए निर्माण के दबाव और गलत तरीके से हो रही खुदाई के कारण दरकने लगी हैं। महिला का कहना है किः
“मेरा मकान कभी भी जमींदोज हो सकता है। मैं बीमार रहती हूँ और इस उम्र में कहाँ जाऊँगी? बिल्डर को कहने पर कोई सुनवाई नहीं होती, उल्टा डर बना रहता है।”
बुजुर्ग महिला ने अब अपनी अंतिम उम्मीद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर और मीडिया के जरिए न्याय की गुहार लगाई है कि उनकी जान और माल की रक्षा की जाए।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह निर्माण न केवल अवैध है बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। सामाजिक संगठनों और निवासियों ने मांग की है किः गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और ज़ोन-7 के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुँचकर जांच करें। नियमों के विरुद्ध बने हिस्से को तुरंत ध्वस्त (Demolish) किया जाए। बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज कर इस अवैध निर्माण को तत्काल सील किया जाए।
लोग हैरान हैं कि आखिर प्रशासन की नाक के नीचे इतना बड़ा उल्लंघन कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
समाचार का निष्कर्ष
गाजियाबाद के साहिबाबाद मैन श्याम पार्क में चल रहे अवैध निर्माण ने न केवल सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि 75 वर्षीय विधवा महिला के जीवन को भी संकट में डाल दिया है। जीडीए ज़ोन-7 और प्रशासन की तत्काल कार्रवाई से ही इस खतरे को रोका जा सकता है, अन्यथा बड़ा हादसा होने का भय बना रहेगा। पीड़िता की गुहार और निवासियों की मांगें दर्शाती हैं कि ‘बाबा के बुलडोजर’ की सख्ती अब इस मामले में जरूरी हो गई है
