गांधी प्रतिमा पर भूख हड़ताल: जी-राम का विरोध
कांग्रेस ब्रेकिंग: जी-राम विवाद में भूख हड़ताल, भाजपा पर हमला
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह योजना महात्मा गांधी द्वारा देश के गरीब, मजदूर और श्रमिक वर्ग को रोजगार देने के उद्देश्य से लागू की गई थी, जिससे लाखों लोगों को काम मिला।
लेकिन सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर “जी-राम” किए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। इसी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष संदीप राणा के नेतृत्व में गांधी पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे एक दिवसीय मौन व भूख-हड़ताल धरना दिया।
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की मानसिकता में महात्मा गांधी और गांधी परिवार के प्रति नफरत साफ दिखाई देती है। इसी नफरत के चलते सबसे पहले महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी मनरेगा योजना का नाम बदला गया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में श्रमिकों और मजदूरों का भला करना चाहती थी, तो वह बिना नाम बदले भी सुधार कर सकती थी। नाम बदलना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस इस फैसले से न तो डरेगी और न ही पीछे हटेगी, बल्कि सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाया जाएगा।
वहीं, भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में हिंदू-मुस्लिम, मंदिर और अन्य मुद्दों को उछालकर जनता को गुमराह करती है, जबकि महंगाई, बेरोजगारी और रोजगार जैसे असली मुद्दों पर बात करने से बचती है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि जब तक मनरेगा के नाम और श्रमिकों के अधिकारों का मुद्दा हल नहीं होता, तब तक सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

सहारनपुर कांग्रेस धरने का निष्कर्ष
मनरेगा के नाम परिवर्तन को लेकर गांधी प्रतिमा के नीचे कांग्रेस का एक दिवसीय अनशन-धरना भाजपा सरकार के खिलाफ सियासी बिगुल फूंक गया। संदीप राणा के नेतृत्व में श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई ने महात्मा गांधी के विचारों को केंद्र में ला खड़ा किया। सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी ने सहारनपुर की राजनीति को गरमा दिया—मनरेगा नाम बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा।
REPORTER-जोगेंद्र कल्याण
